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बिहार: 12 विधान पार्षदों के मनोनयन पर हाईकोर्ट सुनाएगा फैसला , उपेन्द्र कुशवाहा सहित इन मंत्रियों को खतरा

नई दिल्ली। बिहार में राज्यपाल कोटा (Governor Quota) से 12 विधान पार्षदों का मनोनयन को लेकर पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) जल्द ही फैसला सुनाएगा। अब इन विधान पार्षदों का मनोनयन बरकरार रहेगा या खतरा बढ़ेगा, इसे लेकर अब सबकी निगाहें पटना हाईकोर्ट पर टिकी हुई हैं। बता दें कि अगर हाईकोर्ट इस संबंध में सख्त रुख दिखाया है तो नीतीश मंत्रिमंडल के दो मंत्रियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी।

बदल सकती है नीतीश मंत्रिमंडल की तस्वीर

बता दें कि नीतीश (nitish kumar) मंत्रिमंडल के दो मंत्री- जनक राम (janak ram) और अशोक चौधरी (ashok chaudhari) राज्यपाल कोटा से मनोनीत होकर विधान पार्षद बने हैं। इसके बाद ही यह दोनों नेताओं को बिहार की नीतीश कुमार (nitish kumar) सरकार में मंत्री बनाया गया है। वहीं इससे जनता दल युनाइटेड (JDU) के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा के एमएलसी (MLC) पद पर भी खतरा बढ़ सकता है। दरअसल, उपेन्द्र कुशवाह (upendra kushwah) को भी राज्यपाल कोटा से मनोनीत किया गया है।

क्या है पूरा मामला

यह पूरा मसला कुछ यूं है कि पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) में एक याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में राज्यपाल कोटे से मनोनयन को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि भारत के संविधान के प्रावधानों के तहत साहित्य, कलाकार, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता और सहकारिता आंदोलन से जुड़े हुए विशिष्ट लोगों का ही मनोनयन हो सकता है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता को काम का अनुभव व्यावहारिक ज्ञान और विशिष्ट होना चाहिए, लेकिन इन 12 विधान पार्षदों के मनोनयन में इसकी अनदेखी की गई है।

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याचिका में कोर्ट को बताया गया कि जिन बारह लोगों को मनोनीत किया गया है उन्हें ना तो साहित्य से मतलब है, और ना ही वो वैज्ञानिक या कलाकार हैं। इस मामले में याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और अदालत (Patna High Court) ने इस पर फैसला सुरक्षित कर लिया है। अब इस मामले पर सभी की निगाहें कोर्ट पर टिकी हुई हैं।



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