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RBI ने कहा, आर्थिक विकास दर 9.5 फीसदी तक रह सकती है

नई दिल्ली। कोरोना की दूसरी लहर के चलते देश की अर्थव्यवस्था और उद्योग-धंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार देश में कोरोना की तीसरी लहर भी जल्दी आ सकती है, ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक बैठक की थी। इस बैठक में वर्तमान हालातों पर चर्चा कर कई अहम निर्णय लिए गए हैं। बैठक के बाद आरबीआई ने मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए कहा कि नीतिगत ब्याज दरों में लगातार सातवीं बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। बैठक में बैंक रेट को पूर्ववत 4.25 फीसदी ही रखा गया है।

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भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्तमान चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 में रियल जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान 9.5 फीसदी रखा है। रिजर्व बैंक ने जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए वृद्धि दर के अनुमान को 10.5 फीसदी से घटाकर 9.5 फीसदी रखा है। उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह दर 21.4 फीसदी, दूसरी तिमाही में 7.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.3 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.1 फीसदी रहने की संभावना है।

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में वास्तविक जीडीपी ग्रोथ रेट 17.2 फीसदी रह सकती है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में सीपीआई मुद्रास्फीति 5.1 फीसदी रह सकती है।

नहीं घटेगी EMI
रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 4 फीसदी की दर पर ही स्थिर करने का निर्णय लिया है। यह पिछले 20 वर्षों में न्यूनतम है। रिवर्स रेपो रेट भी पहले की ही तरह 3.35 फीसदी रखी गई है। ब्याज दरों में कटौती नहीं करने का फैसला किया गया है। इसके चलते होम लोन तथा अन्य दूसरे लोन की ईएमआई नहीं घटेगी।



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