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पंजाब का किसान आंदोलन खत्म, मुख्यमंत्री ने गन्ना खरीद का दाम बढ़ाकर बना दिया रिकॉर्ड

नई दिल्ली। कई दिनों से गन्ने की फसलों की कीमत (sugarcane purchase) में बढ़ोतरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों (farmer protest in panjab) की मांग को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्वीकार कर लिया है। इसके बाद किसानों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया है। दरअसल, पंजाब के मुख्यमंत्री ने किसानों को भरोसा दिया कि गन्ना खरीद का दाम 310 रुपए से बढ़ाकर 360 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया जाएगा। साध ही 15 दिनों ने बकाया का भुगतान करने का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री ने किसान नेताओं के साथ बैठक के बाद गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है।

सीएम कैप्टन ने बनाया रिकॉर्ड

सीएम कैप्टन के इस फैसले के बाद से पंजाब गन्ने का सबसे अधिक कीमत देने वाला राज्य बन गया है। इससे पहले हरियाणा की मनोहरलाल सरकार ने किसानों को सबसे अधिक गन्ना का रेट देने में देशभर में रिकॉर्ड बनाया था। दरअसल, जनवरी 2021 में हरियाणा सरकार ने गन्ना खरीद का दाम 350 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया था, जो उस समय रिकॉर्ड था। उस दौरान अन्य राज्यों में गन्ना किसानों को अधिकतम 325 रुपए का ही दाम मिल रहा था। सीएम के इस फैसले से किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई थी।

यूपी में गन्ना खरीद का क्या है भाव

देश के सबसे अधिक गन्ना पैदा करने वाले राज्य यूपी में अभी भी किसानों को सबसे अच्छी क्वालिटी के गन्ने के लिए 325 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। बता दें कि किसानों को गन्ने की रिजेक्टेड वैरायटी के लिए 310, सामान्य प्रजाति के गन्ने के लिए 315 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : Farmers protest: तीन साल, वही दाम, यूपी के गन्ना किसान हलकान

किस सरकार ने कितनी बढ़ाई कीमतें

बता दें कि योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद 2017-18 के सीजन में गन्ने का मूल्य 10 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाया गया था और तब से यही कीमतें बनी हुई हैं। अगर पिछली सरकारों की बात करें तो पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने कार्यकाल के दौरान कीमतों में 92 फीसदी बढ़ोतरी की गई थी। वहीं सपा सरकार में 27 फीसदी गन्ना के मूल्य बढ़ाए गए थे।

क्यों कहा गया पंजाब का किसान आंदोलन

गौरतलब है कि राज्य में किसान करीब पांच दिन से गन्ना के दाम में बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल पटरियों को बाधित किया। किसानों का कहना था कि राज्य सरकार द्वारा हाल में घोषित बढ़ोतरी अपर्याप्त थी, क्योंकि उनकी उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। बता दें कि पंजाब का यह किसान आंदोलन दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन से अलग था। दिल्ली की सीमाओं पर किसान बीते कई महीनों से नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शऩ कर रहे हैं।



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