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लालू यादव के बेटों में वर्चस्व की लड़ाई, तेजप्रताप ने दी महाभारत की चेतावनी

नई दिल्ली। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों के बीच पार्टी में हिस्सेदारी की लड़ाई सार्वजनिक होती जा रही है। दरअसल, तेजप्रताव यादव (Tej pratap yadav) ने सोशल मीडिया पर रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari singh dinkar) की कविता रश्मिरथी (Rashmirathi) के माध्यम से तेजस्वी से पार्टी में अपनी हिस्सेदारी मांगी है। तेजप्रताप ने कहा है कि मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए। केवल पांच ग्राम दे दो, बाकी जो भी है उसे रख लो।

संजय यादव को दी दुर्योधन की संज्ञा

इसके साथ ही उन्होंने नेता तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव पर भी निशाना साधा है। तेजप्रताप ने कहा, 'जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है।' उसका भी जिक्र किया है जब कृष्ण गुस्से से कहते हैं, ‘जंजीर बढ़ाकर साध मुझे, हां, हां दुर्योधन! बांध मुझे’। इसका निहितार्थ निकाला जा रहा है कि तेजप्रताप संजय यादव से कह रहे हैं कि दम है तो मुझ पर कार्रवाई करो। माना जा रहा है कि खुद को कृष्ण कहने वाले तेजप्रताप यादव ने कविता के माध्यम से संजय यादव को दुर्योधन की संज्ञा दी है।

रक्षाबंधन पर याद किया बचपन

बता दें कि हाल ही में तेजप्रताप यादव अपने भाई तेजस्वी से मिलने पहुंचे थे, लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने उन्हें तेजस्वी से मिलने नहीं दिया। इस पर उन्होंने मीडिया से कहा था पार्टी के कुछ नेता अपने निजी हित के लिए दो भाइयों के बीच आ रहे हैं। वहीं तेजप्रताप ने दिल्ली में अपनी बहनों से राखी बंधवाते हुए कहा कि याद हैं हमे हमारा वह बचपन, लड़ना- झगड़ना और मना लेना। यही होता है भाई-बहन का प्यार, और इस प्यार को बढ़ाने आ रहा है, रक्षाबंधन का त्‍योहार।

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तेजस्वी के पक्ष में लालू

अगर दोनों भाइयों के बीच वर्चस्व की इस लड़ाई में लालू यादव के पक्ष की बात करें तो उन्होंने पांच वर्ष पूर्व ही तेजस्वी यादव को पार्टी का नेतृत्व सौंपने का इशारा कर दिया था। खास बात यह है कि लालू यादव के इस फैसले को सबने यहां तक कि उनके विरोधियों ने भी स्वीकार कर लिया। राष्ट्रीय जनता दल के विधायकों की मानें तो तेजप्रताप में लालू यादव का बेटा होने के अलावा कोई भी एक गुण नहीं है जो उन्हें जननेता बनाए।

भविष्य को लेकर चिंतित हैं तेजप्रताप

लोगों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में उनका जैसा व्यवहार है कि कभी वो कृष्णा भक्त बन जाते हैं तो कभी शिव भक्त, उससे समाज में उनकी काफ़ी हास्यास्पद छवि बनी है। ऐसे में पार्टी का कोई नेता या कार्यकर्ता उन्हें गंभीरता से नहीं लेता है। वहीं हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में तेजस्वी के नेतृव में पार्टी ने जो प्रदर्शन किया, उसके बाद से तेजप्रताप अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।



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