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'वर्क फ्रॉम होम' से ऊब चुके हैं अधिकतर कर्मचारी

नई दिल्ली। कोरोना महामारी की वजह से घर से काम करना एक नई सामान्य स्थिति बन गई है। ऐसे में एक सर्वे में 59 प्रतिशत पुरुष कर्मचारियों ने कहा है कि कार्य संबंधी दबाव से उनकी निजी जिंदगी प्रभावित हो रही है।

जॉब साइट स्कीकी मार्केट नेटवर्क के सर्वे में यह खुलासा हुआ है। इसी तरह महिलाओं ने भी माना कि वर्क फ्रॉम होम के चलते उनकी व्यक्तिगत लाइफ पूरी तरह से डिस्टर्ब हो चुकी है। घर से काम के बीच कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ रहा है। स्कीकी ने देश के महानगरों में 20 से 26 जून के दौरान 2,500 भागीदारों के बीच यह सर्वे किया है।

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रोजगार नुकसान का व्यापक असर
सर्वेक्षण के अनुसार, 22 फीसदी पुरुषों पर रोजगार नुकसान से प्रभाव पड़ा है, जबकि 60 फीसदी अपने भविष्य को लेकर चिंतित दिखे। वहीं दूसरी तरफ केवल 17 फीसदी महिलाएं ही रोजगार छूट जाने की वजह से प्रभावित दिखीं और 27 फीसदी ही भविष्य को लेकर चिंतित थीं।

काम का बोझ भी एक बड़ा मुद्दा
काम के बोझ की बात की जाए तो केवल 30 फीसदी ने ही इसे मुद्दा बताया है। वहीं 25 फीसदी ने कहा कि काम को लेकर उम्मीदें उनकी क्षमता से कहीं ज्यादा हैं। इस दौरान रोजगार के नुकसान का भी लोगों पर दबाव बढ़ा है। साथ ही रोजगार जाने की चिंता का भी दबाव बढ़ा है।

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कार्यस्थल पर सहयोग नहीं मिलता
23 फीसदी पुरुषों ने कार्यस्थल के माहौल के बारे में कहा कि वे अपनी निरीक्षक पर भरोसा कर सकते हैं। 20 फीसदी पुरुषों का मानना था कि उन्हें कार्यस्थल पर साथियों का सपोर्ट नहीं मिलता। ऐसा सोचने वाली महिलाओं की संख्या 16 फीसदी थी। 68 फीसदी पुरुषों ने कहा कि कार्य के घंटों के दौरान कई बार मन विचलित होता है। वहीं 77 फीसदी महिलाओं ने यही बात कही।



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