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युवा देश की युवा सोच: प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडल विस्तार से साधे एक तीर से कई निशाने

नई दिल्ली। अनंत मिश्रा

चार दिन में भाजपा के दो फ़ैसले। दोनों फ़ैसले चौंकाने वाले रहें। पहला उत्तराखंड को उसके सबसे युवा मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी को देना। दूसरा केंद्रीय मंत्रिमंडल से सबसे अधिक आयु के थावरचंद गहलोत की विदाई। इन दोनों कदमों से संकेत एकदम साफ नजर आ रहें हैं कि भाजपा आलाकमान ने आने वाले दिनों में युवा देश की युवा सोच को राजनीति में मुखर करने की दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर दिया है।

दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के दो साल बाद नरेन्द्र मोदी ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। सूत्रों के अनुसार भाजपा आने वाले विधानसभा चुनाव के साथ - साथ तीन साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव को भी ध्यान में रख रही है। पार्टी का मानना हैं कि भविष्य की चुनावी राजनीति में सफलता हासिल करने के लिए युवाओं को आगे लाना होगा। इसके मद्देनजर ज्योतिरादित्य सिंधिया, वरूण गांधी, जे. नामयांग, सर्वानंद सोनोवाल और शांतनु ठाकुर जैसे नामों पर पार्टी ने गंभीरता से विचार किया। युवा चेहरों में से भाजपा कुछ को मंत्रिमंडल में शामिल करने जा रही है तो बाकी नेताओं को राष्ट्रीय राजनीति में समायोजित करने पर चिंतन - मनन हो रहा है। मोदी ने पिछले एक सप्ताह में गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और संगठन महासचिव बी.एल. संतोष से इस मुद्दे पर लंबी बात की।

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मंत्रिमंडल में अभी धर्मेन्द्र प्रधान, स्मृति ईरानी, किरेन रिजिजू और अनुराग ठाकुर सरीखे चेहरे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि केंद्रीय राजनीति में भाजपा का कद जितना बढ़ा है, उस हिसाब से युवा नेतृत्व सामने नहीं आ पाया है। राज्यों की राजनीति में नेताओं के टकराहट पर पार पाने की द्रष्टि से भी पार्टी युवा नेतृत्व को राज्यों से बाहर निकालने पर विचार कर रही है।

देश युवा लेकिन....
देश की 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम युवाओं की है। बावजूद इसके राजनीति में उन्हें पूरा हक नहीं मिल रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों की औसत आयु 62 साल तो देश के मुख्यमंत्रियों की औसत आयु 64 साल है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया

2020 में जब देश में कोरोना दस्तक दे रहा था तब तक मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस में बगावत दस्तक दे चुकी थी। युवा नेता सिंधिया कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए तो तोहफे के रूप में बीजेपी के लिए मध्यप्रदेश में सरकार भी साथ ले आए। केंद्रीय मंत्रिमंडल में सिंधिया की जगह उसी दिन पक्की हो गई थी जिस दिन मध्यप्रदेश में कमलनाथ की कुर्सी छिन गई थी।

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सर्वानंद सोनोवाल

2016 में असम में भाजपा को पहली बार सरकार बनाने का मौका मिला जिसका नेतृत्व युवा नेता सर्वानंद सोनोवाल के हाथ रहा। 2021 में हुए चुनावों में जनता ने तो उनके काम पर मोहर लगा दी लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के संसदीय बोर्ड में मोहर लगी हिमंता बिस्वा शर्मा के नाम पर। मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देते ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनकी जगह लगभग पक्की हो गई थी।

वरूण गांधी

गांधी परिवार के ऐसे सदस्य जिन्होंने अपना राजनीतिक सफर 2004 में भाजपा के साथ शुरू किया। वरूण गांधी यूपी के युवा नेता तथा पीलीभीत से सांसद हैं। वरूण गांधी की मां मेनका गांधी भी यूपी में पार्टी की बड़ी नेता तथा सुल्तानपुर की सांसद तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री है। यूपी में अगले साल विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी वरूण गांधी को केंद्र में जगह दे सकती है जिसका फायदा अंततः पार्टी को यूपी में ही मिलेगा।

शांतनु ठाकुर

बंगाल के प्रतिष्ठित हरिचंद्र ठाकुर के परिवार के सदस्य हैं और राज्य के पूर्व मंत्री मंजुल कृष्ण ठाकर के पुत्र हैं। शांतनु ठाकुर राज्य की बनगांव सीट से जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। परिसीमन के बाद बनी इस सीट पर जीत दर्ज करवाने वाले ये पहले गैर तृणमूल सांसद हैं। वे उस मटुआ संप्रदाय से हैं, जिसे भाजपा अपने साथ रखना चाहती है। पीएम मोदी ने राज्य विधानसभा चुनाव के बीच हुई अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान भी उन्हें अपने साथ रखा था।

निसिथ प्रमाणिक

पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए युवा नेता निसिथ प्रमाणिक ने कूच बिहार सीट से जीत दर्ज की है। राज्य में तृममूल कांग्रेस के खिलाफ नए नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए ऐसे नेताओं को भाजपा आगे कर रही है जो आने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए मजबूती से लड़ाई लड़ सकें।

जामयांग नामग्याल

जामयांग नामग्याल लद्दाख के युवा नेता तथा लोकसभा के सांसद है। 6 अगस्त 2019 को लोकसभा में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण उन्हें पार्टी के साथ - साथ देश की नजरों में भी ले आया। साल भर के भीतर पार्टी ने उन्हें पिछले साल जुलाई में लद्दाख भाजपा की कमान दी। युवा सोच तथा मजबूत इरादों की वजह से पार्टी आने वाले दिनों में संभवतः इन्हें केंद्र में काम करने का मौका भी दे सकती हैं।

पंकजा मुंडे

महाराष्ट्र की युवा नेता तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी पकड़ रखती है। महाराष्ट्र में 2014 में एनडीए की सरकार बनाने में पंकजा ने अहम भूमिका निभाई थी। महाराष्ट्र में पांच साल कैबिनेट मंत्री रह चुकी पंकजा को पार्टी ने पिछले साल सितंबर में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह दी थी। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर उनका उपयोग करने पर भी विचार कर रहीं हैं।

देवेन्द्र फड़नवीस

सात साल पहले महाराष्ट्र में एनडीए सत्ता में आई तो पहली बार मुख्यमंत्री पद भाजपा के हाथ लगा। पार्टी ने इस पद पर युवा नेता देवेन्द्र फड़नवीस का चुनाव किया। फड़नवीस ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पांच साल तो पूरे किए ही साथ ही साथ महाराष्ट्र में भाजपा को पहले से कई अधिक मजबूत भी किया। ये इसी का नतीजा रहा कि भाजपा 2019 विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। पार्टी में आंतरिक राय है कि फड़नवीस केंद्र में भी बेहतर काम कर सकते है।

जितिन प्रसाद

महीने भर पहले ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद यूपी के युवा नेता तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री है। यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले इनका भाजपा में शामिल होना पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। कांग्रेस में गुटबाजी से पीड़ित प्रसाद भाजपा में देश की सेवा करने के उद्देश्य से शामिल हुए थे। पार्टी भी उन्हें आने वाले दिनों में देश सेवा का मौका दे सकती हैं।

बी. वाय. राघवेन्द्र

कर्नाटक के युवा नेता तथा मुख्यमंत्री येड्डियुरप्पा के पुत्र बी वाय राघवेन्द्र 2009 में पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री एस. बंगरप्पा को हराकर लोकसभा पहुंचे। तीन बार के सांसद तथा कर्नाटक में युवाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाले राघवेन्द्र को पार्टी कर्नाटक से बाहर काम करने का मौका देने पर विचार कर रही हैं।



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