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जब अशोक कुमार ने अपने दोस्त मंटो को पहचानने से कर दिया था इनकार

नई दिल्ली। 'सआदत हसन मंटो' एक ऐसा नाम जो सालों बाद भी लोगों के बीच सुनाई देता है। खासकर कॉलेज के स्टूडेंट्स के बीच। सआदत हसन मंटो द्वारा लिखी किताबें और नाटक आज भी सभी के फेवरेट हैं। मंटो का जन्म आज ही के दिन यानी कि 11 मई को 1992 में लुधियाना के समराला में हुआ था। उनके पिता सेशन जज थे। वहीं मंटो भी पढ़ाई में बेहद होशियार थे। बताया जाता है कि मंटो हाथ उर्दू में काफी तंग था और दो बार वह फेल भी हो चुके थे, लेकिन यह जानकर हैरानी उन्होंने सबसे ज्यादा ख्याति उर्दू और हिंदी के लेख से मिली।

आज भी उनकी 'टोबा टेकसिंह', 'ठंडा गोश्त', 'काली सलवार', काफी प्रसिद्धा हैं। मंटो लेखक ही नहीं बल्कि पत्रकार, फिल्म और रेडियो पटकथा लेखक भी थे। आज उनके जन्मदिन पर हम आपको अभिनेता अशोक कुमार और उनसे जुड़ा एक किस्सा सुनाने जा रह हैं।

अशोक कुमार को मनाते थे जिगरी दोस्त

मंटो ने अपनी और अभिनेता अशोक कुमार की दोस्ती का जिक्र अपनी एक किताब में भी किया है। मंटो अशोक कुमार को अपना जिगरी दोस्त मनाते थे। अशोक कुमार के पास भी मंटो लेकर कई किस्से जमा थे। वहीं मंटो ने एक जगह पर बताया है कि अक्सर अशोक कुमार और उनके बीच इस बात को लेकर बहस होती थी कि उम्र में कौन बड़ा है? इस सवाल पर अक्सर दोनों झगड़ भी पड़ते थे। वहीं एक बार अशोक कुमार ने मंटो से कहा कि वह उन्हें दादा कह कर बुलाया करें।

जिस पर मंटो ने कहा कि वह उनसे ज्यादा उम्रदारज हैं। जिसके बाद हुआ कुछ यूं कि दोनों ने एक-दूसरे की उम्र का हिसाब निकाला। जिसमें अशोक कुमार मंटो से दो महीने और कुछ दिन बड़े निकल गए। फिर क्या था मंटो को अशोक कुमार को दादा मुनी कहना पड़ा।

जब मंटो को अशोक कुमार ने पहचाने से कर दिया था इनकार

मंटो ने अक्सर अशोक कुमार की भूल जाने की आदत का भी जिक्र किया है। यह उस वक्त की बात है जब मंटो दुनिया को अलविदा कह गए थे। एक इंटरव्यू में अशोक कुमार ने मंटो को लेकर ऐसी बातें कही थी। जिन्होंने खबरों का बाज़ार गर्म कर दिया था। उस इंटरव्यू में जब एक्टर अशोक कुमार से मंटो को लेकर प्रश्न किया तो उन्होंने पहली बार मंटो को पहचाने से मना कर दिया। वहीं अक्सर मंटो को लेकर अक्सर अशोक कुमार को यह कहते हुए सुना कि वह शराब बहुत पीते थे और अश्लील कहानियां लिखते थे।

बताया जाता है कि एक्टर अशोक कुमार द्वारा यह बयान उन दिनों का सबसे ज्यादा दोहराया जाने वाला बयान था। वैसे आपको बतातें चलें कि जब मंटो जिंदा थे। तब भी उन्हें अपने लेखकों की वजह से काफी अलोचनाओं का सामना करना पड़ता था।

 



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