फोन टैपिंग: अब सियासी अखाड़े में उतरी दिल्ली

नई दिल्ली/जयपुर । राजस्थान में एक बार फिर सियासी संग्राम की आहट है। अबकी बार सीधे तौर पर दिल्ली से अशोक गहलोत सरकार की घेराबंदी हुई है। संयोग यह है कि एक दिन पहले पूर्व एसीएस (गृह) रोहित कुमार सिंह की दिल्ली में प्रतिनियुक्ति के आदेश हुए। इसके 24 घण्टे बाद ही केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह ने दिल्ली पुलिस के एक थाने में सीएम के ओएसडी और तत्कालीन एसीएस (गृह) सहित अन्य के खिलाफ अवैध रूप से उनकी फोन टैपिंग करने का मामला दर्ज करा दिया। केंद्र और राज्य के बीच कानूनी दांव-पेच की यह जंग अब सियासत की नई पटकथा लिखती नजर आ रही है।

फोन टैपिंग का मामला राजस्थान विधानसभा में उठने और सरकार के जवाब के बाद दिल्ली और राजस्थान की राजनीति फिर गरमा गई है। फोन टैपिंग को लेकर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से की गई शिकायत पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को मामला दर्ज कर लिया। शिकायत में शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा, तत्कालीन एसीएस (गृह) राजीव स्वरूप एवं अन्य लोगों पर अवैध तरीके से फोन टैप करने के आरोप लगाए हैं। निजता का हनन और छवि धूमिल करने के आरोप भी लगाए हैं। उनका आरोप है कि लोकेश शर्मा और तत्कालीन एसीएस (गृह) समेत अन्य लोगों ने षड्यंत्र कर अवैध तरीके से जनप्रतिनिधियों के फोन टैप किए। उसकी रिकॉर्डिंग पिछले वर्ष 17 जुलाई को मीडिया तक पहुंचाई। अब इस प्रकरण की जांच दिल्ली क्राइम ब्रांच के अधिकारी भी करेंगे। जानकारी के अनुसार शेखावत ने दिल्ली के तुगलक रोड थाने में पिछले शनिवार को शिकायत दी थी। इसे गुरुवार को दर्ज कर क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने सतीश मलिक को जांच अधिकारी बनाया है।

एसीबी की जांच जारी, एसओजी की बंद-
मुख्यमंत्री के ओएसडी की ओर से जारी आडियो टैप के आधार पर सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी ने एसओजी और एसीबी में 17 जुलाई 2020 को केस दर्ज करवाए। एसओजी में तीन एफआइआर दर्ज थीं, जिनमें एफआर लग चुकी है। एक में एसीबी अब भी विधायकों के खरीद-फरोख्त मामले की जांच कर रही है।

एफआइआर अब क्यों-
शेखावत के अनुसार पहले राज्य सरकार ने फोन टैपिंग नहीं करना बताया, इस कारण पुलिस में दर्ज नहीं कराया। अब 17 मार्च को मंत्री शांति धारीवाल ने विधानसभा में स्वीकारा कि फोन टैपिंग की रिकॉडिंग सीएम के ओएसडी लोकेश शर्मा ने मीडिया में जारी की। अत: अब जांच के लिए मामला दर्ज कराया है।
एफआइआर दिल्ली में ही क्यों-
गजेंद्र सिंह शेखावत का कार्य क्षेत्र दिल्ली है और दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है। दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। राजस्थान से बाहर की एजेंसी जांच करेगी तो यहां की सरकार के प्रभाव से दूर रहेगी।
जांच में नहीं चाहिए अनुमति-
किसी राज्य की पुलिस को अन्य राज्य में जाकर जांच या गिरफ्तारी के लिए अनुमति की अनिवार्यता नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार कानून में संबंधित थाना पुलिस को सूचना देने का प्रावधान जरूर है।

प्रतिष्ठा को क्षति, मानसिक अशांति भी-
गजेंद्र सिंह की शिकायत के अनुसार विधायक भंवरलाल शर्मा, संजय जैन और शिकायतकर्ता की बातचीत को गैर कानूनी तरीके से व षड्यंत्रपूर्वक किसी व्यक्ति या पार्टी के हित के लिए टैपिंग करने और वायरल करने से उनकी प्रतिष्ठा को क्षति पहुंची। मानसिक अशांति भी हुई।

शांति धारीवाल के सदन में दिए जवाब का हवाला-
शेखावत की शिकायत में संसदीय मंत्री शांति धारीवाल के विधानसभा में दिए जवाब का भी हवाला दिया गया है। इसमें धारीवाल ने लोकेश शर्मा की ओर से रिकॉर्डिंग वायरल करने की बात स्वीकार की थी। सदन में फोन टैपिंग मुद्दे पर सरकार से बयान दिलवाने की मांग पर विपक्ष अड़ गया था। गौरतलब है कि विधायक कालीचरण सराफ के अगस्त में विधानसभा में लगाए सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने सक्षम अधिकारी की अनुमति से फोन टैप करने की बात स्वीकार की थी। धारीवाल ने जवाब में दावा किया कि किसी भी जन प्रतिनिधि के फोन की टैपिंग नहीं की गई। विपक्ष एक भी जन प्रतिनिधि की फोन टैपिंग की बात सिद्ध कर दे तो मुख्यमंत्री सहित सत्तापक्ष के सभी सदस्य इस्तीफा दे देंगे।

ये हो सकता है आगे-
एक ही मामले की जांच दो अलग-अलग राज्यों की पुलिस कर रही है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार यह मामला भविष्य में दोनों जांच एजेंसियों के बीच आपसी खींचतान का मुद्दा बन सकता है। इसलिए इसकी जांच सम्भवत: सीबीआइ या केंद्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को दी जा सकती है। हालांकि राजस्थान सरकार ने सीबीआइ को राज्य सीमा में कार्रवाई के लिए अनुमति नहीं दे रखी है। धारीवाल ने सदन में तर्क दिया था कि फोन टैपिंग की शुरुआत हथियारों की बड़ी खेप और भारी मात्रा में विस्फोटक राज्य में पहुंचने की प्राथमिक सूचना से हुई, इसलिए इस मामले को एनआइए को भी सौंपा जा सक ता है।

निजता का हनन...
निजता का हनन करने को कानून की नजर में अपराध माना जाता है लेकिन कांग्रेस इस अपराध के खिलाफ पुलिस में की गई शिकायत को ही षड्यंत्र बता रही है। इतनी धृष्टता कहां से लाते हैं ये कांग्रेसी!
गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री

भाजपा का षड्यंत्र-
पुलिस वॉइस सेम्पल लेने दिल्ली गई तो छिप गए। भाजपा फिर सरकार गिराने का षड्यंत्र रच रही है। आखिर मंत्री को 8 माह बाद याद क्यों आई? वे पहले वॉइस सैपल दें। उन पर संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव का मामला भी है। गोविन्द सिंह डोटासरा, प्रदेशाध्यक्ष, कांग्रेस



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