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हिन्दुत्व ब्रिगेड को हिन्दू परंपरा की समझ नहीं, भारतीय संस्कृति नए विचारों को स्वीकार करती है

मानो बढ़ती कोविड महामारी, गड़बड़ाती अर्थव्यवस्था, उच्च बेरोजगारी और बड़ा किसान आंदोलन काफी नहीं था, जो हिन्दूवादी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नया संकट ला दिया है: सांस्कृतिक युद्ध। नवंबर में BJP शासित उत्तर प्रदेश मुख्य रूप से काल्पनिक अपराध लव जिहाद के खिलाफ कानून लाया।

उप्र विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश कहता है कि अगर एक महिला केवल शादी के लिए इस्लाम अपनाती है, तो शादी ‘शून्य’ घोषित कर दी जाएगी। शादी के बाद धर्म बदलने की इच्छुक महिलाओं को अनुमति के लिए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को आवेदन देना होगा। यह व्यक्तिगत आजादी पर हमला है, जिसमें स्त्री-द्वेष, पितृसत्ता और धर्मांधता का मिश्रण है।

यह उपाय उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिमाग की उपज है, जिनके भड़काऊ भाषणों ने उन्हें BJP की चर्चित शख्सियत बना दिया। यह कानून देश के संविधान के तहत प्रदान की गई पूजा की आजादी पर प्रहार है। दिसंबर के पहले हफ्ते में ही राज्य पुलिस ने सात लोगों को इसके तहत गिरफ्तार कर लिया। हिन्दू-मुस्लिम संवाद से उपजी भारत की गंगा-जमुनी तहजीब पर अब आधिकारिक रूप से भड़काई गई धर्मांधता का हमला हो रहा है।

BJP को राजनीतिक शक्ति हठधर्मी हिन्दू समुदाय के वाहक के रूप में आक्रामक प्रचार से मिलती है और मुस्लिम-विरोधी भावनाओं को उकसाने को वह वोट पाने का साधन मानती है। BJP पहले भी सफलतापूर्वक ट्रिपल तलाक को अपराध बना चुकी है, मुस्लिम बहुल राज्य जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीन चुकी है और ऐसा कानून लागू कर चुकी है, जो मुस्लिम शरणार्थियों को जल्द भारतीय नागरिकता पाने से रोकता है।

इन कदमों ने पार्टी की मुस्लिमों पर सख्त छवि को मजबूत किया है और उप्र का नया कानून भी ऐसा ही है। हाल के हफ्तों में अन्य BJP शासित राज्यों ने भी ‘लव जिहाद‘ पर उन्माद दिखाया है, जो पार्टी की जड़ों में मौजूद इस्मालोफोबिया को दर्शाता है। मध्य प्रदेश और हरियाणा की राज्य सरकारें भी ऐसा कानून बनाने की घोषणा कर चुकी हैं।

मध्य प्रदेश के एक BJP नेता ने हाल ही में नेटफ्लिक्स पर हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया, क्योंकि उसकी एक सीरीज में मुस्लिम अभिनेता व हिन्दू अभिनेत्री के बीच मंदिर के सामने चुंबन दृश्य था। नेता गौरव तिवारी ने आपत्तिजनक दृश्य हटाने की मांग की। इस मामले में मप्र के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जांच के आदेश दिए थे।

यहां तक कि इन खबरों से कि उप्र में पुलिस ने सबूतों के अभाव में लव जिहाद के 14 मामलों में से 8 बंद कर दिए, BJP का सांप्रदायिक उत्साह ठंडा नहीं पड़ेगा। कुछ महीने पहले एक ज्वेलरी ब्रांड को भी विज्ञापन में अंतर धार्मिक विवाह दिखाने पर हिंसा की धमकियां दी गई थीं।

हालांकि इस्लाम BJP का पसंदीदा लक्ष्य रहा है, लेकिन उसने भारतीय ईसाई अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक क्रियाकलापों पर भी नाराजगी जताई है। BJP से जुड़े बजरंग दल ने हाल ही में उन हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा की धमकी दी थी, जो क्रिसमस पर चर्च जाएंगे। जहां हिंदू धर्म अन्य धर्मों का सम्मान करना सिखता है, वहीं जो इसके योद्धा होने का दावा करते हैं, वे ऐसी सार्वभौमिकता को नहीं मानते।

विडंबना यह है कि हिन्दुत्व ब्रिगेड को हिन्दू परंपरा की समझ नहीं है। भारतीय मूल्यों की उनकी समझ न सिर्फ प्राचीन और संकीर्ण मानसिकता वाली है, बल्कि पूर्णत: अनैतिहासिक है। भारतीय संस्कृति हमेशा ही नए व विभिन्न विचारों को स्वीकारने वाली रही है।

आज भारतीय सभ्यता में मुख्य युद्ध इन दो के बीच है.. पहले वे, जो मानते हैं कि हमारी संस्कृति विविध और व्यापक है और दूसरे जिन्होंने खुद अपनी संकीर्ण सोच के साथ ठान लिया है कि वे ही सच्चा भारतीय होने को परिभाषित करेंगे।

आधुनिक हिन्दू धर्म को हमेशा मतभेदों के प्रति सहिष्णु होने पर गर्व रहा है। आधुनिक युग के सबसे प्रसिद्ध हिन्दू संत स्वामी विवेकानंद ने सिखाया था कि हिन्दू सभ्यता सिर्फ सहिष्णु नहीं है, बल्कि यह स्वीकारती भी है। आज के धर्मांध मूल रूप से अपने ही धर्म हो धोखा दे रहे हैं, साथ ही संविधान को चोट पहुंचा रहे हैं।

यह मुद्दा छोटा नहीं है। अगर असहिष्णु गुंडों को उनकी असहिष्णुता और कानूनी भय दिखाने पर भी बचने दिया गया, तो बतौर सभ्यता और आजाद लोकतंत्र, भारत के अस्तित्व के लिए जरूरी चरित्र को हिंसा का सामना करना पड़ेगा।

बहुलतावदी और लोकतांत्रिक भारत को अपनी विभिन्न पहचानों की बहुलतापूर्ण अभिव्यक्ति को सहना होगा। अगर हम हिन्दू संस्कृति के स्व-घोषित पंचों को अपना पाखंड और दोहरे मापदंड थोपने देंगे, तो वे भारतीयता को तब तक परिभाषित करते रहेंगे, जब तक वह भारतीय ही न रह जाए।

BJP के नेतृत्व में चल रहे इस सांस्कृतिक युद्ध से अदालतों में लड़ना चाहिए, लेकिन इसे सभी भारतीयों के दिलों में जीता जाएगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)



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शशि थरूर, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद


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