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सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने नौकरी न मिलने पर घर-घर फल और सब्जी पहुंचाने के लिए शुरू किया शॉप ऑन व्हील

जम्मू के रहने वाले 26 वर्षीय अताउल्लाह बुखारी ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पढ़ाई की। फिर नौकरी नहीं मिली तो सब्जी और फल बेचने का काम शुरू किया। मगर तरीका बिलकुल नया और हाईटेक था। नतीजा ये रहा कि कम समय में ही अताउल्लाह का स्टार्टअप शॉप ऑन व्हील चर्चित हो गया।

जम्मू के राजौरी जिले के अताउल्लाह का परिवार जम्मू शहर के बठिंडी इलाके में ही रहता है। वह चंडीगढ़ पढ़ाई करने गए, सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनकर लौटे भी मगर कोई खास नौकरी जम्मू में नहीं मिली। तो सोचा कि बाहर जाकर नौकरी तलाश की जाए लेकिन कोरोना ने घर पर ही बैठा दिया। अताउल्लाह के पास न तो नौकरी थी और नौकरी ढूंढने के ऑप्शन। एक दिन अचानक ख्याल आया कि कुछ अपना काम ही शुरू किया जाए।

काम शुरू करने से पहले अताउल्लाह ने नौकरी ढूंढ रहे अपने दो दोस्तों को भी साथ लिया।

अताउल्लाह कहते हैं, ‘जैसे ही अनलॉक हुआ मैंने एक थ्री व्हीलर ऑटो फाइनेंस कराया और उसको ‘शॉप ऑन व्हील’ की तरह डिजाइन करवाया। इतना तो तय था के इन दिनों लोगों को अगर घर बैठे हाइजेनिक तौर पर साफ- सुथरी और अच्छी क्वालिटी की सब्जियां और फल मिलेंगे तो वह जरूर खरीदेंगे। इसलिए मैंने एक एक वेबसाइट www.flyekart.com डिजाइन की।

सितम्बर में काम शुरू करने से पहले दो पढ़े-लिखे मगर रोजगार की तलाश कर रहे दोस्त अब्दुल मतीन और आमिर निसार से बात की तो वो भी साथ काम करने के लिए तैयार हो गए। हम तीनों ने तय किया के चाहे सब्जी महंगी मिले या कम बिके लेकिन हम क्वालिटी से कोई समझौता नहीं करेंगे।

शुरुआत में हमने जम्मू की मशहूर नरवाल मंडी से फल-सब्जियां खरीदकर, कम दाम पर लोगों के घरों तक अच्छी फल-सब्जी पहुंचानी शुरू की। आज हम जम्मू के करीब 100 घरों को ऑनलाइन और वॉट्सऐप ऑर्डर के जरिए सब्जी दे रहे हैं। इसके अलावा हम जम्मू के कई रिहायशी इलाकों और सोसाइटी में जाकर भी फल-सब्जी बेच रहे हैं।'

अताउल्लाह कहते हैं 'हम अभी इस काम में नए हैं तो प्रॉफिट से अधिक लोगों का सेटिस्फेक्शन जरूरी है।'

अताउल्लाह कहते हैं कि उन्होंने आगे की भी प्लानिंग की है। अब वो कई किसानों से भी बात कर रहे हैं ताकि ऑर्गेनिक सब्जियां भी खरीदकर बेच सकें। वहीं जैसे-जैसे डिमांड बढ़ रही है उसके मुताबिक कुछ और लोडिंग कैरियर खरीदकर उसे शॉप ऑन व्हील की तर्ज कर तैयार करके मार्केट में उतारेंगे और धीरे-धीरे इस कॉन्सेप्ट को जम्मू-कश्मीर के अन्य जिलों तक भी लेकर जाएंगे।

अताउल्लाह बताते हैं ‘हम लोगों ने दो लाख रुपए में लोडिंग कैरियर फाइनेंस करवाया और फिर बाकी कुछ खर्च उसकी डिजाइनिंग पर किया। इसके बाद हमने काम शुरू किया तो प्रॉफिट होने लगा। हालांकि हम अभी इस काम में नए हैं तो प्रॉफिट से अधिक लोगों का सेटिस्फेक्शन जरूरी है। हमारी कोशिश है कि इस काम को और आगे लेकर जाएं और अपना अलग मुकाम बनाएं।


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