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सेबी का बड़ा निर्णय, कैश मार्केट के नॉन F&O शेयरों का बढ़ा हुआ मार्जिन वापस लिया

पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है। कैश मार्केट के नॉन फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) शेयरों के लिए बढ़ाया हुआ मार्जिन वापस लेने का फैसला किया है। यह फैसला सेबी ने ठीक अपनी मीटिंग से पहले लिया है। आज ही सेबी की मीटिंग भी हो रही है। सेबी ने कुछ समय पहले ही इसे लागू किया था, लेकिन अब वापस ले लिया है। ये फैसला आज के बाजार की क्लोजिंग से लागू होगा।

20 से 40 पर्सेंट का मार्जन

बता दें कि सेबी ने F&O शेयरों के लिए 20 से 40% का मार्जिन लगाया था। इसे लेकर काफी विरोध भी हुआ था। पर अब इसे वापस लिया जाएगा। इसी के साथ वायदा बैन पर भी थोड़ी राहत दी गई है। सेबी ने मार्जिन 20 मार्च को बढ़ाया था जिसके तहत कई चरणों में 40% तक मार्जिन लगा था। इसमें 20% सर्किट वाले शेयरों पर ज्यादा मार्जिन लगा था लेकिन अब मार्केट फीडबैक के बाद सेबी ने ये फैसला लिया।

नियमों में मिलेगी थोड़ी राहत

सेबी के नये फैसले के बाद F&O शेयरों में वायदा बैन के नियमों में थोड़ी राहत मिलेगी। इसके बाद 95 पोजिशन पर ही शेयर बैन में जाएगा। अभी 5 दिन में शेयर के 15 पर्सेंट तक बढ़ने पर 50 प्रतिशत पोजिशन पर ही बैन में जाता है। इसके अलावा F&O में डायनॉमिक प्राइसिंग लागू रहेगी। और सर्किट पर 15 मिनट का कूलिंग ऑफ रहेगा।

एसएमएसी की आज बैठक

बता दें कि आज SEBI के पैनल SMAC की बेहद अहम बैठक होने जा रही है। इसमें सेटलमेंट का दिन घटाकर T+1 करने पर चर्चा हो सकती है। ब्रोकर्स के CAPITAL ADEQUACY नियमों पर भी विचार संभव है। बता दें कि SMAC सभी बाजार भागीदारों का प्रतिनिधित्व करता है। इस पैनल की यह पहली मीटिंग है। SMAC का जो भी फैसला होगा, वह सेबी अपने बोर्ड में ले जाएगा, जहां से उसे मंजूर किया जाएगा। कमिटी इस मीटिंग में चार मुद्दों पर चर्चा करेगी। इसमें सेटलमेंट के समय में कमी की जाएगी। इसे टी+1 (ट्रेडिंग के बाद एक दिन) पर लाया जाएगा।

हर 3 महीने में जीरो अमाउंट पर फैसला

इसके साथ ही हर 3 महीनों में ग्राहकों के लिए जीरो अमाउंट पर फैसला लेना होगा। ब्रोकर्स के लिए कैपिटल एडिक्वेसी नियमों को लेकर इसमें फैसला हो सकता है। साथ ही बैंकों को एक अलग कंपनी की जरूरत होगी जो क्लियरिंग मेंबर हो सके। जानकारी के मुताबिक सेबी की योजना है कि वह मौजूदा टी+2 को कम कर टी+1 कर दे। अगर ऐसा होता है तो भारत इस तरह का सेटलमेंट करने वाला दूसरा इक्विटी बाजार होगा।

सेबी ने इस मामले में टी+1 के मैकेनिज्म को लेकर तमाम प्लेटफॉर्म पर चर्चा की है। लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो (FPI) निवेशक इसके विरोध में हैं।



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सेबी ने टी+1 के मैकेनिज्म को लेकर तमाम प्लेटफॉर्म पर चर्चा की है। लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो (FPI) निवेशक इसके विरोध में हैं


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