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इस दिवाली बाजार के उतार-चढ़ाव को पीछे छोड़ फायदा कमाने के लिए बैलेंस एडवांटेज फंड में कीजिए निवेश

इस दिवाली अगर आप बाजार में उतार-चढ़ाव को पीछे छोड़ एक बेहतर रिटर्न चाहते हैं तो आपको बैलेंस एडवांटेज फंड (BAF) का रास्ता अपनाना चाहिए। दरअसल बैफ म्यूचुअल फंड की एक कैटेगरी है जो आपके निवेश को इक्विटी और डेट में निवेश करती है।

रिटेल निवेशक अक्सर ज्यादा भाव पर खरीदते हैं

अक्सर देखा जाता है कि रिटेल निवेशक शेयर बाजार में तब निवेश करते हैं जब बाजार उंचाई पर होता है। यानी निवेशक महंगे वैल्यूएशन पर खरीदी करते हैं। इसका असर यह होता है कि वे महंगे पर खरीदते हैं लेकिन बेचते सस्ते भाव पर हैं। इससे उनको घाटा होता है। बैफ यहीं पर काम करता है। बैफ सस्ते में खरीदता है और महंगे में बेचता है। जब बाजार ऊपर होता है तो वह आपका निवेश डेट में डाल देता है। जब बाजार नीचे होता है तो वह इक्विटी में खरीदी करता है।

दो कंपनियों के पास इंडस्ट्री के कुल एयूएम का 70% हिस्सा

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में बैफ कैटेगरी के कुल असेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 70% हिस्सा देश की दो सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल (ICICI Pru) और HDFC के पास है। हालांकि 31 अक्टूबर तक प्रदर्शन के मामले में ICICI Pru टॉप पर है। इसने 5 साल में 7.93 और 10 साल में 10.53% का रिटर्न दिया है। जबकि एचडीएफसी ने इसी अवधि में 5.15 और 7.99% का रिटर्न दिया है। मार्च 2010 से ICICI Pru ने 11.2% का जबकि इसके बेंचमार्क निफ्टी-50 ने 9.3% का रिटर्न दिया है।

10 हजार महीने का निवेश 10 साल में 20.28 लाख हुआ

अगर किसी निवेशक ने ICICI Pru में 10 हजार रुपए की मासिक एसआईपी की होगी तो यह निवेश आज 20.28 लाख रुपए हो गया है। ICICI Pru का एयूएम 26,439 करोड़ रुपए है। इसका इक्विटी में निवेश 30 से 80 पर्सेंट होता है जो बाजार के वैल्यूएशन पर निर्भर है। ICICI Pru AMC के एमडी निमेश शाह कहते हैं कि जब भी बाजार में अवसर होते हैं, वहां पर एक जोखिम भी होता है। तमाम वैश्विक फैक्टर्स से बाजार में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। इसलिए हमारा मानना है कि ऐसे समय में बैलेंस एडवांटेज फंड आपको एक ऑफर देता है।

कोर पोर्टफोलियो में बैफ होना चाहिए

निमेश शाह कहते हैं कि हर किसी निवेशक के कोर पोर्टफोलियो में यह प्रोडक्ट होना चाहिए। क्योंकि यह सभी जोखिम प्रोफाइल में निवेशकों की जरूरतों को पूरा करता है। इस कैटेगरी में असेट अलोकेशन का एक व्यापक वेरिएशन होता है। इसका तमाम फंड हाउस पालन करते हैं। कुछ फंड हाउस प्राइस टु अर्निंग (P/E) रेशियो का पालन करते हैं जबकि कुछ P/E और प्राइस टु बुक (PB) को मिलाकर चलते हैं। आईसीआईसीआई PB मॉडल का पालन करता है। इससे स्कीम का प्रदर्शन ज्यादा होता है।

उतार-चढ़ाव में होता है फायदा

इस प्रकार के म्यूचुअल फंड स्कीम का अन्य फायदा यह होता है कि जब भी बाजार उतार-चढ़ाव में होता है यह उससे निपटने में सक्षम होते हैं। उदाहरण स्वरूप मार्च 2020 में जब बाजार में भारी गिरावट आई थी तब इस स्कीम ने अच्छा काम किया था। हालांकि निवेशकों ने डर के मारे पैसा उस समय नहीं लगाया। पर बैलेंस एडवांटेज फंड ने अपनी एक्सपोजर इक्विटी में बढ़ा दिया। दिसंबर 2019 में इक्विटी में इस स्कीम का एक्सपोजर 46 पर्सेंट था, जो मार्च 2020 में बढ़कर 74 पर्सेंट हो गया। फिर जब बाजार वहां से रिकवर होना शुरू हुआ तो इक्विटी में एक्सपोजर घटकर 62 पर्सेंट हो गया।

इस साल में बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न बैफ का

इस साल से लेकर अब तक बेंचमार्क जहां अभी कम स्तर पर कारोबार कर रहा है, वहीं कई बैलेंस एडवांटेज फंड ने उससे ज्यादा का फायदा दिया है। यह कैटेगरी लंबे समय में भी अच्छा लाभ देती है। निवेशक इसमें एसआईपी के जरिए लंबी अवधि के लक्ष्यों जैसे शादी, शिक्षा या रिटायरमेंट के लिए निवेश कर सकते हैं। कुछ फंड हाउस ने हाल में इस स्कीम को लांच किया है। जबकि आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इस कैटेगरी में पायनियर है।



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इस साल से लेकर अब तक बेंचमार्क जहां अभी कम स्तर पर कारोबार कर रहा है, वहीं कई बैलेंस एडवांटेज फंड ने उससे ज्यादा का फायदा दिया है। यह कैटेगरी लंबे समय में भी अच्छा लाभ देती है


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