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थोक महंगाई में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी, अक्टूबर में बढ़कर 1.48% पर पहुंची, सितंबर में 1.32% थी

देश की थोक महंगाई में लगातार तीसरे महीने तेजी दर्ज की गई। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) पर आधारित महंगाई दर अक्टूबर में उछलकर 1.48 फीसदी पर पहुंच गई। सितंबर में थोक महंगाई की दर 1.32 फीसदी थी।

एक साल पहले की समान अवधि में थोक महंगाई की दर 0 (शून्य) फीसदी रही थी। मैन्यूफैक्चर्ड सामानों की थोक महंगाई दर बढ़कर पिछले महीने 2.12 फीसदी पर पहुंच गई, जो सितंबर में 1.61 फीसदी थी। एक साल पहले की समान अवधि में मैन्यूफैर्च्ड सामानों की महंगाई दर (-) 0.93 फीसदी रही थी।

प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर 5.10% से घटकर 4.74% पर आई

प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर अक्टूबर में घटकर 4.74 फीसदी रही, जो सितंबर 2020 में 5.10 थी। एक साल पहले की समान अवधि में प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर 6.05 फीसदी रही थी। WPI में प्राइमरी आर्टिकल्स का योगदान 22.62 फीसदी होता है।

खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर 8.17% से घटकर 6.37% पर आई

खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर भी घटकर 6.37 फीसदी पर आ गई, जो सितंबर में 8.17 फीसदी पर और एक साल पहले की समान अवधि में 9.80 फीसदी पर थी।

  • आलू पिछले महीने 107.70 फीसदी महंगा हुआ। सितंबर 2020 में यह 107.63 फीसदी महंगा हुआ था।
  • प्याज अक्टूबर में 8.49 फीसदी महंगा हुआ, जबकि सितंबर में इसकी कीमत 31.64 फीसदी घटी थी।
  • दाल पिछले महीने 15.93 फीसदी महंगा हुआ, सितंबर 2020 में यह 12.53 फीसदी महंगा हुआ था।

खुदरा महंगाई की दर अक्टूबर में बढ़कर 7.61% पर पहुंची

पिछले गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक देश की खुदरा महंगाई दर अक्टूबर में बढ़कर 7.61% पर पहुंच गई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित यह दर सितंबर में 7.27% थी। खाद्य वस्तुओं की खुदरा महंगाई दर पिछले महीने 11.07 फीसदी रही। लगातार 7वें महीने खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लक्ष्य से ऊपर रही है।

खुदरा और थोक महंगाई क्या होती है

सरकार दो तरह की महंगाई दर जारी करती है- खुदरा महंगाई दर और थोक महंगाई दर। खुदरा महंगाई दर नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) जारी करता है। थोक महंगाई दर वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय जारी करता है। खुदरा महंगाई दर खुदरा कीमत के आधार पर तय की जाती है। सरकार अपनी योजना बनाते समय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीति तय करते समय खुदरा महंगाई दर को ही महत्व देते हैं। खुदरा महंगाई दर बढ़ने का सीधा मतलब यह है कि महंगाई की मार सीधे तौर पर आम आदमी पर पड़ रही है। थोक महंगाई का संबध कंपनी द्वारा थोक विक्रेताओं से ली गई कीमत से होता है।



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​​​​​​​मैन्यूफैक्चर्ड सामानों की थोक महंगाई दर बढ़कर पिछले महीने 2.12% पर पहुंच गई, जो सितंबर में 1.61% और एक साल पहले की समान अवधि में (-) 0.93% थी


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