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1.5 करोड़ की आबादी वाले शहर में 21 लाख लोग हो सकते हैं संक्रमित, सरकारी अस्पतालों के 80% और निजी हॉस्पिटलों में 90% बेड फुल

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का उत्तरी इलाकापुरानेशहर में आता है। बेलगछिया, खिदिरपुर, काशीपुर, घोष बगान, सौदागरपट्‌टी सरीखे अधिकांश स्लम एरिया इसी क्षेत्र में आते हैं। बेलगछिया की गलियां इतनी संकरी हैं कि दोपहर में भी सूरज की रोशनी रास्ते पर नहीं पड़ती। यह शहर का सबसे बड़ा स्लम एरिया है, जहां 50 हजारसे ज्यादालोग रहते हैं। यही शहर का पहला हॉटस्पॉट था। शहर की एक-तिहाई आबादी स्लम एरिया में रहती है।

कोलकाता में ज्यादातर लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। लोग दो गज की दूरी का पालन नहीं कर रहे हैं।

बीते 7 दिनों में कोलकाता में 18 नए कंटेनमेंट जोन बने हैं। भवानीपुर में 4, बाघ बाजार में 2, कंकरगाछी 2, अलीपुर 2, उल्टाडांगा 2, इंद्रपुरी स्टूडियो, मुकुंदपुर, गारीहाट, लेक रोड, पंडितिया रोड और टॉलीगंज में 1-1 कंटेंनमेंट जोन हैं। इनमें 1872 आइसोलेशन यूनिट हैं। यह दक्षिणी कोलकाता का इलाका है। इनमें कोई स्लम एरिया नहीं है,ज्यादातर मल्टीस्टोरबिल्डिंग हैं।

दिक्कत यह है कि इन दिनों लोग पूरे कोलकाता में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं।कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (केएमसी) नेसरकार एक रिपोर्ट सौंपी है जिसके मुताबिककोलकाता के कोरोना मरीजों में करीब15% ही स्लम से एरिया से औरबाकीअपार्टमेंट से हैं। हालांकि शुरुआती दिनों में ज्यादातर मामले स्लम एरिया से आ रहे थे और शहरों से कम आ रहे थे।

कोलकाता के7 बड़े सरकारी कोविडअस्पतालों में 2085 बेड हैं, इनमें 80% फुल हैं।

इन तीन घटनाओं से समझिए कोलकाता में कोरोना के हालात

  • 1. उत्तर कोलकाता के एक परिवार को अपने 71वर्षीय बुजुर्ग की बॉडी रखने के लिए आइसक्रीम फ्रिजखरीदना पड़ा। बुजुर्ग को कुछ दिनों से खांसी-बुखार था। उसकी मौतउसी दिन हो गई जिस दिन कोरोना की जांच के लिएसैंपल लिया गया। रिपोर्ट 48 घंटे बाद आई और पॉजिटिव निकली तब राज्य सरकार के स्वास्थ्य कर्मियों ने परिजनों से अंतिम संस्कार के लिए बॉडी हासिल की। लेकिन, इन 48 घंटों में परिवार को मृत्यु प्रमाण पत्र इसलिए नहीं मिलाक्योंकिरिपोर्ट नहीं आई थी। बिना रिपोर्ट के बॉडी रखने के लिए कोई मुर्दा घर भी तैयार नहीं था। इसलिए परिवार फ्रिजर खरीदना पड़ा ताकि बॉडी डी-कम्पोज न हो।
  • 2. उल्टाडांगा इलाके में 2 जुलाई कोएक 55 वर्षीय मिठाई दुकान के मैनेजर की मौत हो गई। बॉडी मिठाई रखने वाले फ्रिजर में रखनी पड़ी। मैनेजर कुछ दिनों से सर्दी-खांसी-बुखार से पीडि़त था। 29 जून को परिजनों नेकोरोना जांच कराई। तब वे वह घर पर ही थे। हालत खराब हुई तो उन्हें कोलकाता मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। मौत के बाद कोरोना की जांच रिपोर्टपॉजिटिव पाई गई। 18 घंटे बादप्रोटोकॉल के हिसाब सेअंतिम संस्कार किया गया।
  • 3. सत्येन पार्क, ठाकुरपुकुर के रहने एक सिक्योरिटी गार्ड की 3 जुलाई को मौत हो गई।चार दिनों से उसेबुखार औ सांस लेने में परेशानी थी। लेकिन, किसी डॉक्टर से नहीं दिखायाथा। हालत बिगड़ी तो परिजन एक निजी अस्पताल ले गए। वहां से सरकारी अस्पताल रेफर किया गया लेकिनरास्ते में ही मौत हो गई।
यहां लोग कोरोना को लेकर बेपरवाह हैं, कोई सावधानी नहीं बरत रहा है। बसों में लोग ठूंसे जा रहे हैं।

इन घटनाओं से पता चलता है कि शहर में महामारी का क्या हाल है।कोलकाता नगर निगम के प्रशासक फिरहाद हकीम का आरोप है कि निजी लैब से टेस्ट की रिपोर्ट सही समय पर सरकार के पास नहीं आ रही, इसी वजह से मुसीबतबढ़ रहीहै। एक डॉक्टर ने बताया कि कोरोना से हुई मौतों के मामले में बिना किसी ठोस कारण के कोई प्राइवेट प्रैक्टिशनर प्रमाण-पत्र जारी नहीं कर सकता।

जिनकी कोरोना की रिपोर्ट है उसके लिएकोई परेशानी नहीं है, लेकिन जिसके पासरिपोर्ट नहीं आई है, उसके साथदिक्कत है। खासकर जो मौतें अस्पतालों के बजाए घरों में हो रहीं हैं। जिनकी मौत कोरोना से हो रही है केएमसी उन्हें धापा में जला रहा है। वहीं लावारिस लाशों को जलाने का बंदोबस्त कूड़ा डंपिंग यार्ड मेंहै। इस इलाके में जाने पर सख्त पाबंदी है।

कोलकाता में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामले

कोलकाता में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अलीपुरदुआर, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, साउथ 24 परगना, पूर्वी मेदिनीपुर और कोलकाता में 2396 सैंपल टेस्ट किया।इनमें सबसे ज्यादा14.39% संक्रमण की दर कोलकाता में ही पाई गई। दूसरे पायदान पर साउथ 24 परगना था। अभीकोलकाता समेत हावड़ा, हुगली, उत्तर-दक्षिण 24 परगना में ही83% कोराना के केस हैं।

कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की रिपोर्ट के मुताबिक कोलकाता के कोरोना मरीजों में करीब 15% ही स्लम एरिया से और बाकीअपार्टमेंट से हैं।

लापरवाही बरत रहे हैं लोग

एहतियात के तौर पर भले ही सरकार ने लॉकडाउन 31 जुलाई तक बढ़ा दिया है। इसके तहत स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, सिनेमा हॉल, जिम, स्वीमिंग पूल, पार्क, थिएटर, बार, मेट्रो इस दौरान बंद रहेंगे। लेकिन लोग बेपरवाह हैं, वे नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। राज्य के मुख्य सचिव ने 30 जून को आदेश निकाला था कि मास्क न पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग न मेंटेन करने पर कार्रवाई होगी।

हालांकि आदेश के 2 दिन बाद गृह सचिव अलापन बंदोपाध्याय ने निर्देश दिया कि मास्क न पहनने वालों को चेतावनी देकर घर भेजा जाएगा, दूसरी बार फिर चेतावनी दी जाएगी और तीसरी बार दंड दिया जाएगा। लेकिन, यह सब कागजी कार्रवाई से ज्यादा कुछ नहीं है। क्योंकि कोलकाता जिस ओर बढ़ रहा हैवह चिंताजनकहै। कोरोना से यहां जंग बेहद अनौपचारिक ढंग से लड़ी जा रही है।सिटी बसों में बोरे की तरह लोग ठूंसे जा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने यहां सैंपल टेस्ट को लेकर कोई लिखित आदेश नहीं दिया है।एसोसिएशन ऑफ हेल्थ सर्विस डॉक्टर्स के महासचिव डॉ मानस गुमटा के मुताबिककोलकाता कोराना की ज्वालामुखी बन चुका है। क्योंकि शुरुआती तैयारी में कहीं न कहीं कमी रह गई। हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। ज्यादातर मामले कोलकाता और उससे सटे इलाकों से ही आ रहे हैं। जिस अनुपात में मरीज बढ़ रहे हैं, उस हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है।

आईसीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दिनों में कोलकाता में 21 लाख लोग संक्रमण का शिकार हो सकते हैं।

ज्यादातर अस्पतालों में बेड फुल हैं

राजधानी के 7 बड़े सरकारी कोविडअस्पतालों में 2085 बेड हैं, इनमें 80% फुल हैं। कोलकाता और उत्तर 24 परगना के 32 निजी अस्पतालों में 1138 बेड हैं, 90% फुल हैं। डॉ गुमटा बताते हैं कि आईसीएमआर की स्टडी में कोलकाता में संक्रमण की दर सर्वाधिक 14.39% पाई गई। इस हिसाब से 1.5 करोड़ की आबादी वाले शहर में 21 लाख लोग संक्रमित हो सकते हैं। इनमें सेज्यादातरएसिम्पटोमेटिक हैं। यानी शहर में कम्युनिटी स्प्रेडहोचुका है।

होम क्वारैंटाइन के नियमों का नहीं हो रहा पालन

कोरोना के मामले में इलाज से ज्यादाकारगर बचावहोता है, जो लोग बरत नहीं रहे। आइसोलेशन और क्वारैंटाइन ही उपाय है। शहर के एक-एक घर में 5-6 लोग रहते हैं, ऐसे में होम क्वारैंटाइन कारगर हो ही नहीं सकता। जबकि राज्य सरकार का फोकस होम क्वारैंटाइन पर ही है। बीते 6 दिनों (29 जून से 4 जुलाई) में सरकार के डीजी हेल्थ सर्विसेस डॉ अजय चक्रवर्ती को कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए 5एडवाइजरी जारी करनी पड़ी है।

सरकार की ओर से निजी अस्पतालों को निर्देश है कि वे कोरोना के मरीजों को एडमिट करने से मना नहीं कर सकते। ऐसा करने पर इन अस्पतालों का लाइसेंस तक रद्दकिया जा सकता है। निजी अस्पतालों पर आरोप है कि वहां इलाज के नाम पर लोगों की जेब काटी जा रही। इस सवाल पर वेस्ट बंगाल हेल्थ रेग्युलेटरी कमीशन के चेयरमैन जस्टिस (रि.) असीम बैनर्जी कहते हैं, जितना शोर है, उस अनुपात में शिकायतें नहीं हैं।

बीते 7 दिनों में कोलकाता में 18 नए कंटेनमेंट जोन बने हैं।। इनमें कोई स्लम एरिया से नहीं है, ज्यादातर मल्टीस्टोरबिल्डिंग से ही हैं।

17 मार्च से लेकर अब तक कमीशन को सिर्फ 10 शिकायतें मिली। लोगों को न्याय मिला। अस्पतालों को पैसा रिफंड तक करना पड़ा। लोगों को लगता है कि निजी अस्पताल जेब काट रहे हैं तो कहीं और जाने की बजाएसीधे कमीशन के पास आएं। नकेल कसने के लिए हम बैठे हैं। इस बीच दो दिन पहले राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले पीपीई किट,टेस्ट और कंसल्टेंसी पर कैप लगा दिया है।

कोरोनारोकने लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदम

  • अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और मुंबई, गुजरात, चेन्नई, दिल्ली, पुणे से आने वाली घरेलू उड़ानों पर रोक।
  • 1 जुलाई से सर्दी, खांसी, जुकाम होने पर 1 जुलाई से ही टेलिमेडिसीन सेवा शुरू।
  • सरकार ने कोविड वॉरियर क्लब का गठन किया है। इसमें कोरोना को हरा चुके लोग शामिल हैं, जो मरीजों की देखभाल में लगेंगे। शुरुआत बहरामपुर से हुई है। वॉरियर्स को मुर्शीदाबाद, मालदा और कोलकाता मेडिकल कॉलेज में लगाया जाएगा। ये लोग कोविड मरीजों को खाना देंगे। उनकी हौसला अफजाई करेंगे। सरकार की तरफ से उनको भुगतान भी किया जाएगा।
  • सरकार नेनोवल कोरोनावायरस और कोविड-19 को अगले सत्र से स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है।
  • सरकार 3 करोड़ मास्क खरीदेगी और लोगों मेंबांटेंगी, जिसमें स्कूली बच्चे, पुलिस, फायर सर्विस के लोग, सिविक वालंटियर शामिल होंगे।


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कोलकाता में लोग सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस वजह से यहां मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आईसीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक यहां कम्युनिटी स्प्रेड फैल चुका है।


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