क्या कारण है कि मुंबई में कोरोना का संकट कम नही हो रहा है आईये जानते है

भारत में महाराष्ट्र कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है,तीन दिनों से राज्य में कोरोना के लगातार एक हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. 22 हजार से अधिक के आंकड़े के साथ महाराष्ट्र में पूरे देश के एक-तिहाई से अधिक मामले हैं. राज्य में भी 12 हजार से अधिक मामले सिर्फ मुंबई में हैं. बिगड़ती स्थितियों के मद्देनजर सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो अर्द्धसैनिक बलों को भी मदद के लिए बुलाया जा सकता है. हालांकि उद्धव ठाकरे ने बाद में इससे इंकार कर दिया है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इस वक्त कोरोना वायरस का केंद्र बन गई है.

महाराष्ट्र के साथ एक मुश्किल ये है कि बीते एक महीने के दौरान यहां नए मामले आने की संख्या घटने का नाम नहीं ले रही है. राज्य में इस वक्त 1297 एक्टिव कंटेनमेंट जोन हैं. करीब ढाई लाख लोग पूरे राज्य में होम क्वारंटाइन में हैं. सरकारी क्वारंटाइन सेंटर में मौजूद लोगों की संख्या 15 हजार के आस-पास है. लेकिन महाराष्ट्र में मामलों की तेजी से बढ़ती संख्या पर सवाल भी उठने लगे हैं. क्या महाराष्ट्र में कोरोना से निपटने में ढिलाई बरती गई या फिर वजह कुछ और है.

रहने के ज्यादा सघन इलाके


मुंबई में एशिया का सबसे बड़ा झोपड़-पट्टी इलाका धरावी भी है. शुरुआत में तो यहां से मामले नहीं आए थे. लेकिन अब यहां से भी तेजी के साथ नए मामले आ रहे हैं. धरावी से निकल रहे कोरोना के मामलों ने प्रशासन को चिंतित कर दिया है. धरावी में मामलों को रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार विशेष रूप से ध्यान दे रही हैं. क्योंकि माना जा रहा है कि अगर इस इलाके में महामारी का मास स्प्रेड हुआ तो फिर उसे रोक पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा.

उम्रदराज और बीमार लोगों की मौत ज्यादा
महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के मामलों की गंभीरता इस वजह से भी ज्यादा बढ़ी है क्योंकि यहां संक्रमित होने वाले लोगों में एक बड़ी संख्या उम्रदराज और पहले बीमार लोगों की भी है. मृतकों में बड़ी संख्या 61 से 90 साल तक के उम्रदराज लोगों की है. हालांकि अगर इसकी तुलना केरल से की जाए तो वहां पर डेथ रेट काफी कम है. साथ ही कोरोना से लड़कर ठीक होने वालों में 93 साल तक के बुजुर्ग भी शामिल हैं.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट कहती है कि महाराष्ट्र ने कोरोना वायरस की टेस्टिंग की रफ्तार भी काफी तेज रखी है. ये भी एक वजह है जिसकी वजह से राज्य में कोरोना के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं. गौरतलब है कि बड़े स्तर पर टेस्टिंग को इस महामारी को नियंत्रित करने के सबसे सटीक उपायों में गिना जाता रहा है.

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तबलीगी जमात के केस से भी आई थी तेजी
दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात की बैठक के बाद महाराष्ट्र में भी मामलों में तेजी आई थी. राज्य सरकार ने इस मामले से जुड़े केस में तेजी के साथ कॉटैक्ट ट्रेसिंग कर करीब 15 सौ लोगों को क्वारंटाइन किया था.

अप्रवासी मजदूरों की भी बड़ी संख्या
महाराष्ट्र ऐसा राज्य है जहां पर बड़ी संख्या अप्रवासी मजदूरों की रहती है. कोरोना की वजह से सख्त लॉकडाउन की वजह से ये अप्रवासी मजदूर सड़क पर आ गए. कई जगह ऐसे भी मामले सामने आए जहां पर बड़ी संख्या में भीड़ लगाकर अप्रवासी मजदूर दिखाई दिए. इसे लेकर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना भी की गई थी.

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धरावी ऐसा देखता है
कुछ जगहों में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन के प्रमाण
राज्य में कुछ जगहों पर अब कम्यूनिटी ट्रांसमिशन या फिर मास स्प्रेड जैसे हालात भी सामने आए हैं. राज्य के डिजास्टर सर्विलांस ऑफिरस प्रदीप आवटे ने कहा है कि कुछ जगहों पर कम्यूनिटी ट्रांसमिशन के कुछ प्रमाण मिले हैं. हालांकि पूरे राज्य में अब भी क्लस्टर में ही ज्यादा मामले मिल रहे हैं. उनका कहना है कि मुंबई की स्थिति देश की अन्य जगहों से इसलिए भी अलग है क्योंकि यहां पर कई इलाकों में आबादी का घनत्व काफी ज्यादा है.


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