60% शहरी और 89% ग्रामीण घरों में सीधे पानी की सुविधा नहीं; 60% भारतीय परिवार खाने से पहले बिना साबुन के ही हाथ धोते हैं

चीन के वुहान शहर से निकला कोरोनावायरस 5 महीने के भीतर ही दुनिया के लगभग सभी देशों में पहुंच गया है। अब तक 30 लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और करीब 2.5 लाख लोगों की मौत हो गई है। कोरोना का अभी कोई असरदार इलाज नहीं मिल सका है। जिस तरह इसको फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन ही एकमात्र तरीका है। उसी तरह से इससे बचे रहने का भी एकमात्र तरीका साफ-सफाई और बार-बार हाथ धोना है।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, कोरोना से बचने के लिए दिन में बार-बार कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह साबुन से हाथ धोना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से इस तरह की एडवाइजरी आ चुकी है। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर हाथ धोने के लिए पानी ही न हो, तो क्या करें? मुंह पर हाथ रखकर खांसने या छींकने के बाद, आंख, नाक या मुंह पर हाथ लगाने के बाद हाथ धोना चाहिए। इसके अलावा किसी अजनबी व्यक्ति से संपर्क में आने पर, शौच के बाद, किसी सरफेस पर हाथ लगने के बाद और खाना खाने से पहले भी हाथ धोना चाहिए।

एक व्यक्ति को हाथ धोने के लिए दिन में 20 पानी चाहिए

अगर डब्ल्यूएचओ के तय मानकों पर बार-बार हाथ धोएं जाए तो एक दिन में कम से कम एक व्यक्ति10 बार हाथ धोएगा। एक व्यक्ति को 20 सेकंड तक हाथ धोने के लिए कम से कम 2 लीटर पानी की जरूरत है। मतलब दिनभर में 20 लीटर। इस तरह से 4 लोगों के एक परिवार को दिन में 10 बार हाथ धोने के लिए 80 लीटर पानी चाहिए। लेकिन, सच्चाई तो ये है कि भारत में आधे से ज्यादा आबादी के पास पानी की कोई सुविधा ही नहीं है।

आंकड़े क्या कहते हैं?
नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस यानी एनएसएसओ ने जुलाई से दिसंबर 2018 के बीच एक सर्वे किया था। इस सर्वे को पिछले साल ही जारी किया गया है। इस सर्वे के मुताबिक, देश के सिर्फ 21.4% घरों में ही पाइप के जरिए सीधे पानी आता है। यानी, 79% घर ऐसे हैं, जहां सीधे पानी नहीं आता। इसका मतलब ये हुआ कि इन्हें पानी के लिए ट्यूबवेल, हैंडपंप, कुएं, वॉटर टैंकर के भरोसे रहना पड़ता है।

शहरी : देश की 20% आबादी ही शहरों में रहती है। शहरों के 40.9% घरों में ही पाइपलाइन के जरिए पानी आता है। यानी, 59% परिवार पानी के लिए दूसरे सोर्स पर निर्भर हैं।

ग्रामीण : अभी भी 80% आबादी ग्रामीण इलाकों में ही रहती है। यहां के सिर्फ 11.3% घरों में ही पाइपलाइन के जरिए पानी आता है। यानी, यहां के 89% परिवार पानी के लिए दूसरे सोर्स पर निर्भर हैं।

सब साबुन से हाथ धोने की बात कह रहे, लेकिन हमारे यहां 60% से ज्यादा परिवारों में खाना खाने से पहले हाथ साबुन से नहीं धोते
एनएसएसओ के इसी सर्वे के मुताबिक, देश के सिर्फ 35.8% परिवार ही ऐसे हैं, जहां खाना खाने से पहले हाथ धोने के लिए साबुन या डिटर्जेंस का इस्तेमाल होता है। जबकि, 60.4% परिवार ऐसे हैं, जहां खाने से पहले सिर्फ पानी से ही हाथ धो लिए जाते हैं।

कितने घरों में खाने से पहले साबुन से हाथ धोते हैं लोग?

साबुन/डिटर्जेंट से सिर्फ पानी से
देश 35.8% 60.4%
शहरी 56.0% 42.1%
ग्रामीण 25.3% 69.9%

इसी तरह से 74% परिवार में ही शौच के बाद साबुन या डिटर्जेंट से हाथ धोए जाते हैं। जबकि, 13.4% परिवारों में शौच के बाद सिर्फ पानी से ही हाथ धुलते हैं।

कितने घरों में शौच के बादहाथ धोने के लिए साबुन भी नहीं?

साबुन/डिटर्जेंट से सिर्फ पानी से
देश 74.1% 13.4%
शहरी 88.3% 9.8%
ग्रामीण 66.8% 15.2%

एक सर्वे ये भी; 40% भारतीयों को टॉयलेट के बाद हाथ धोने की आदत ही नहीं
यूके की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी ने 24 मार्च को एक सर्वे जारी किया था। इस सर्वे में 63 देशों को शामिल किया गया था। सर्वे में शामिल लोगों से पूछा गया कि टॉयलेट के बाद हाथ धोते हैं या नहीं? हैरानी वाली बात ये है कि, इसमें 40% भारतीयों ने माना कि टॉयलेट के बाद उन्हें हाथ धोने की आदत ही नहीं है। इस मामले में भारत 10वें नंबर पर था।

चीन, जहां से कोरोनावायरस निकला, वहां के 77% लोग ऐसे थे, जिन्होंने सर्वे में टॉयलेट के बाद हाथ न धोने की बात मानी। चीन के बाद जापान के 70%, दक्षिण कोरिया के 61% और नीदरलैंड के 50% लोगों ने यही बात मानी थी। सर्वे में अमेरिका का स्कोर सबसे अच्छा रहा। वहां के 23% लोगों ने ही माना कि वो टॉयलेट के बाद हाथ नहीं धोते।



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