गाेलीबारी थमने के 13 घंटे बाद कर्नल को फोन करने पर आतंकी ने रिसीव किया था कॉल

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा में कर्नल आशुताेष शर्मा, मेजर अनुज सूद, नायक राजेश, लांसनायक दिनेश और पुलिस सब इंस्पेक्टर सगीर अहमद पठान की टीम घर में घुसकर लोगों को बंधक बनाने वाले आतंकियाें काे पकड़ने गई थी। सेना, सीआरपीएफ और पुलिस की टीम ने शनिवार शाम ऑपरेशन शुरू किया। फायरिंग के बाद टीम ने घर में घुसकर बंधकाें काे छुड़ा लिया। तभी आतंकियाें ने गोलीबारी शुरू कर दी।
सैन्य सूत्राें के मुताबिक, मुठभेड़ के 13 घंटे बाद घर से गाेलीबारी का शाेर थमा ताे बाहर तैनात टीम ने कर्नल आशुतोष की टीम से संपर्क करना चाहा। लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। रेडियो सेट भी डैमेज हो गया था। तब मोबाइल पर संपर्क किया गया, जिसे एक आतंकी ने उठाया और आवाज आई "अस्लामवालेकुम।'' कुछ देर बाद फिर फोन मिलाया, तब भी आतंकी ने ही फोन उठाया और आवाज आई"अस्लामवालेकुम।'' इस काॅल ने अभियान का रुख बदल कर रख दिया।
सैन्य सूत्राें के मुताबिक, कर्नल शर्मा की टीम उस घर में शनिवार शाम करीब 5.30 बजे दाखिल हुई थी। वे परिवार काे सफलतापूर्वक घर से निकालने में कामयाब हाे गए थे। लेकिन खुद फंस गए। लेकिन इस बात का सुरक्षा बलाें काे जरा भी अंदेशा नहीं हुआ। शाम 6 से रात 10 बजे तक बाहर खड़े जवानाें ने संपर्क करने की काेशिश की, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चार घंटे बाद रात करीब 10 बजे एक आतंकी ने फाेन उठाया और "अस्लामवालेकुम'' से जवाब दिया। इसके बाद रुकी फायरिंग फिर शुरू हाे गई, जाे रातभर चलती रही। इसलिए सुरक्षा बलाें के पास वहीं रुके रहने के अलावा काेई चारा नहीं था। तड़के फायरिंग रुकी। इसके बाद जब सुरक्षा बल घर में दाखिल हुआ ताे उन्हें दाे आतंकियाें के शव मिले। एक ही पहचान हैदर के रूप में हुई। वह लश्कर का जम्मू-कश्मीर का शीर्ष कमांडर था। मुठभेड़ राजवार जंगल क्षेत्र में हुई। जब आतंकी एलओसी से घुसपैठ करते हैं तो इस एरिया में पहले से मौजूद आतंकी उन्हें रिसीव करते हैं। वहां सर्च ऑपरेशन जारी हैं।

मेजर अनुज सूद : पिता भी सेना में थे, सुनकर रो पड़े
शहीद मेजर अनुज सूद का परिवार पंचकूला के अमरावती एन्क्लेव में रहता है। उनके पिता ब्रिगेडियर सीके सूद भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। पिता को जब बेटे अनुज की शहादत की खबर मिली तो वे खुद काे राेक नहीं पाए और राे पड़े।
पुलिस सब इंस्पेक्टर सगीर अहमद पठान
1999 में जम्मू कश्मीर आर्म्ड पुलिस में बताैर कांस्टेबल भर्ती हुए थे और स्वेच्छा से स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप से जुड़े थे। साहसिक कामाें की बदाैलत बारी से पहले तीन प्रमाेशन पाकर सब इंस्पेक्टर बने थे। पुलिस मेडल सहित कई बार वीरता सम्मान से अलंकृत हाे चुके थे। जब कर्नल आशुताेष शर्मा की अगुवाई में टीम हंदवाड़ा के घर में परिवार काे निकालने के लिए घुसी ताे पठान हमेशा की तरह सबसे आगे रहे। तीन बेटियाें औरएक बेटे के पिता 41 वर्षीय काजी हंदवाड़ा से अच्छी तरह परिचित थे। इसी कारण वे ऑपरेशन से जुड़े थे।
आतंकियाें से लड़ने के लिए बनाई गई थी राष्ट्रीय रायफल्स, 5 साल पहले भी कर्नल शहीद हाे चुके
सेना की यूनिट 21 राष्ट्रीय राइफल्स का गठन ही आतंकियाें से लड़ने के लिए किया गया था। पांच साल बाद कश्मीर में कर्नल रैंक के किसी अफसर की शहादत हुई है। जनवरी 2015 में 42आरआर के कमांडिंग अफसर और कर्नल एमएन राय आतंकियाें से लड़ते हुए शहीद हुए थे। इससे पहले 21 अगस्त 2000 में कमांडिंग अफसर कर्नल राजिंदर चाैहान ने शहादत दी थी।



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जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में एक घर के लोगों को बंधक बनाकर बैठे आतंकियों को ढेर करते हुए राष्ट्रीय राइफल्स की 21वीं बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा समेत 5 जांबाज शहीद हो गए।


from Dainik Bhaskar /local/rajasthan/jaipur/news/when-the-colleagues-called-the-colonel-the-terrorist-picked-up-and-said-aslamwalekum-127270001.html
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